दीवान-ए-सराय 01: मीडिया विमर्श://हिन्दी जनपद
दीवान-ए-सराय 01: मीडिया विमर्श :// हिन्दी जनपद डिजा़इन और प्रस्तुति: सराय मीडिया लैब, सराय, दिल्ली संपादन: श्रृंखला संपादक रविकान्त, इस दीवान के संपादक: रविकान्त + संजय शर्मा पुस्तक सज्जा: डिजा़इन: मृत्युंजय चैटर्जी + रेणु अय्यर कवर डिजा़इन: मृत्युंजय चैटर्जी डिजा़इन संयोजक + फो़टॉग्राफी़: मॉनिका नरूला उत्पादन: अनुवाद: योगेन्द्र दत्त, अनिल कुमार, भास्कर जुयाल प्रभात कुमार, देनानंद, सारिन, संजय शर्मा, रविकान्त कॉपी संपादन: श्वेता, योगेन्द्र दत्त, सोहन पाल सहयोग: सोहन पाल, आर. एस. आनंद प्रकाशक: सराय: नवसंचार पहल सेंटर फॉ़र द स्टडी ऑफ़ डेवेलपिंग सोसायटीज़ 29, राजपुर रोड, दिल्ली - 110054, भारत फो़न: (+91) 11-23928391, फै़क्स: (+91) 11- 23943450 ई-मेल: dak@sarai.net + वाणी प्रकाशन 21, ए दरियागंज, नई दिल्ली 110002 प्रकाशन तिथि दिल्ली, 2002 इस किताब के किसी भी शैक्षिक और गै़र-व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए प्रकाशक से इजाज़त लेने की ज़रूरत नहीं है।अलबत्ता लेखकों और प्रकाशकों को इत्तला कर दें तो उन्हें बेहद खु़शी होगी। मुद्रक: एसएन प्रिंटर्स, दिल्ली - 110032 आइएसबीएन: ISBN – 81-901429-2-5 |
भूमिका विरासत: प्रिंट/रेडियो/टीवी हिन्दी पत्रकारिता: प्रिंट संस्कृति के बदलते परिदृश्य (1900-1940) अविनाश कुमार हिन्दी पब्लिक स्फि़यर: हिन्दी की सार्वजनिक दुनिया फ़्रंचेस्का ओरसीनी ‘बाजा़रू’ साहित्य: औपनिवेशिक उत्तर भारत में अश्लीलता विवाद चारु गुप्ता ओडि़या बनाम बांग्ला: भाषा विवाद और ओडि़या सांस्कृतिक पहचान प्रगति महापात्र हिन्दी में कवर ड्राइव: भूमंडलीकरण के दौर में युयुत्सु क्रिकेटीय राष्ट्रवाद अभय कुमार दुबे मास मीडिया और साहित्य मनोहर श्याम जोशी ‘लुगदी’ साहित्य के अँधेरे-उजाले प्रभात रंजन इस प्रपंच में सिर्फ़ स्त्री न थी सुधीश पचौरी बीबीसी तरंगों पर उड़ते-उड़ते संजय शर्मा टेलीविज़न सत्याग्रह के वे दिन बाप्सी सिध्वा एसटीडी/आईएसडी मॉनिका नरूला भाषा के बोल: ये ख़लिश कहाँ से होती... आलोक-राय+ संजय शर्मा + शाहिद अमीन ...जो जिगर के पार होता शाहिद अमीन+ आलोक राय + पलाश कृष्ण मेहरोत्रा शहर के निशां सदन झा/प्रभाष रंजन संचार के नवाचार: संदर्भ और विकल्प: भारत में मीडिया और राज्य: कालक्रम जीबेश बागची इंटरनेट का संक्षिप्त इतिहास बूस स्टर्लिग आधुनिकता के पुनर्संस्करण: भारत की दो नंबरी इलेक्ट्रॉनिक संस्कृति रवि सुन्दरम चारदीवारी के भीतर: आईटी उद्योग में काम का निजी तजुर्बा मृत्युंजय चैटर्जी हिन्दी वेब जगत: भविष्य का इतिहास रविकान्त कॉपीलेफ़्ट क्या है? आग का कॉपीराइट! इयान कलार्क सॉफ़्टवेयर किसी की मिल्कियत नहीं होनी चाहिए: क्यों? रिचर्ड स्टॉलमैन कुछ भ्रामक/द्विअर्थी शब्द और जुमले... जिनसे बचना चाहिए पायरेसी आपकी दोस्त है जैरोन लैनियर हैकर नैतिकता कॉपीराइट का पुनर्मूल्यांकन: केंद्र में जनता ही रहे रिचर्ड स्टॉलमैन टैक्टिकल मीडिया: एक अंतरंग निर्देशिका गीयर्ट लोविक डिजिटल युग में पुस्तक का भविष्य रॉजर शार्तिए + हॉवर्ड राइनगोल्ड + उएनो चिजुको + थेन्स वोन्गयान्नावा |









